सभापति की कलम से.....
परिबर्तन समय की पुकार भी है व आवशयकता भी है, महापरिषद ने समाज हित में एक कदम बढ़ाते हुए विद्द्यजनों की राय व प्राप्त पुस्तकों कें प्रमाणिकता के आधार पर समाज को एक साथ लाने के उद्देश्य से 7गौत्र के सौबर्ष गोत्र /के अपभ्रन्स गौत्र /र्कौशिक को समाहित करते हुऐ समाज की एकीकरण की दिशा में मीठे चतुर्वेदीयों के 37 अल्लो को जोड़ते हुऐ 101अल्लो पर आगे बढ़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है.
हम सभी मथुरा से पलायन कर दूर दराज स्थानों पर जा वसे, जहाँ गए बहा के होकर रह गए अपनों से अपनों का विछोह ही नहीं हुआ, हम अपने मूल संस्कारो रीती रिबाजो से भी दूर हो गए, *हमें पुन: अपनों को तलाश कर अपने साथ लाने का वक्त है*.
ये एक प्रयास है हमारा,समाज की कई सामाजिक समस्याओं के सार्थक समाधान का?, समाज की संख्यात्मक एकता प्रदर्शित करने का? अपनी रीती रिवाजो व विचारों के आदान प्रदान का?बर्ग भेद की दीबार को तोड़ साथ खड़े होने का?
हम सयंम के साथ अपनी सोच को सकारत्मक बनाये अपने अंदर छिपी नकारत्मकता को त्यागे.
हम एक सामाजिक कार्यशाला के आयोजन की योजना भी बना रहें है. जिसमें हम गुरुजनो, ब सामाजिक अनुभबी बिद्दजनों द्वारा सामूहिक रूप से अपने संस्कारो, रीती रिबाजो पर चर्चा के साथ आगामी कार्ययोजना को भी मूर्त रूप देने की दिशा में अग्रसर होंगे.
आइये हम समाज हित के लिए,एक नई सोच के साथ आगे आये, कदम से कदम मिलाए. समाज की एकता में ही समाज की प्रगति है.
जय समाज ?जय संगठन
( नीरज चतुर्वेदी )